Thursday, April 8, 2010

सिर्फ स्वयं होना काफी है

  1. सिर्फ अज्ञान के कारण ही दो व्यक्ति किसी एक बात पर राजी होते हैं । 
  2. किसी भी तरह की प्रभावित करने की चेष्टा बहुत गहरे में दूसरे व्यक्ति को गुलाम बनाने की चेष्टा है । 
  3. प्रभावित होने से बचना हो तो पक्ष-विपक्ष से बचना पड़ता है । नहीं तो प्रभाव पड़ ही जाता है । 
  4. प्रत्येक व्यक्ति अद्वितीय है ।  दूसरों से तुलना न करें । 
  5. एक-एक मनुष्य अतुलनीय है । 
  6. न मानने की फिक्र करना, न न मानने की । 
  7. आदमी एक अनंत घटना है । उसमें अनंत रूप हैं । 
  8. स्वयं की विचार प्रक्रिया को समझें । 
  9. आदमी का मन बहुत आश्चर्यजनक है, उसके लिए निषेध ही आमंत्रण है । 
  10. मित्र जब दुखी होते हैं, तो दुश्मनी से कम पर नहीं रुकते । 
  11. मैं मित्र नहीं बनाता, क्योंकि मित्रता में पोटेंशियल शत्रु छिपा है । 
  12. जिंदगी बहुत इनकंसिस्टेंट है, सिर्फ मौत कंसिस्टेंट है । 
  13. अधिकतर संत सैडिस्ट होते हैं या मेसोचिस्ट होते हैं ।या तो वे दूसरे को सताते हैं या स्वयं को सताते हैं । और जो खुद को सताने में कुशल होता है वह दूसरे को सताने का अधिकार पा जाता है । 
  14. जब तक सीधे सत्यों को देखने की हिम्मत न जुटाएँ, बड़ी मुश्किल होती है ...स्वयं को देखने की । 

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