Sunday, April 4, 2010

प्रेम की तरंग

प्रेम की तरंग तो युवा मन में उठती है - अनुभवहीन मन में उठती है प्रेम का तो विस्तार ही अनुभवहीनता में होता है प्रेम तो एक तरह का पागलपन है जब तुम बहुत अनुभवी हो जाते हो, तो प्रेम की तरंग उठती नहीं अनुभव मार डालता है तरंग को - ओशो ( कहै कबीर मैं पूरा पाया , प्रवचन सं. 16 से संकलित )

1 comment: