Wednesday, April 14, 2010

नए की खोज


  1. हर पल और हर क्षण नया  होता है ।
  2. दुनिया में दो ही तरह के लोग हैं, एक वे जो अपने को नया करने का राज खोज लेते हैं और एक वे जो अपने को पुराना बनाए रखते हैं ।
  3. उत्सव हमारे दुखी चित्त के लक्षण हैं ।
  4. जब तक दुनिया में दुखी आदमी हैं तभी तक उत्सव हैं ।
  5. जिस दिन दुनिया में प्रसन्न लोग रहेंगे उस दिन उत्सव नहीं रहेंगे; क्योंकि रोज ही उत्सव का दिन होगा ।
  6. जब दुनिया में दुखी लोग हैं तब तक मनोरंजन के साधन हैं । जिस दिन आदमी आनंदित होगा
 उस दिन मनोरंजन के साधन एकदम विलीन हो जाएंगे ।
7.      सिर्फ दुखी आदमी मनोरंजन की खोज करता है और सिर्फ दुखी आदमी ने उत्सव ईजाद किए हैं ।
8.      रोज नया चित्त हो तो रोज नया दिन हो ।
9.      जो एक क्षण में शांत होने की तरकीब जान लेता है वह पूरी जिंदगी शांत रह सकता है ; क्योंकि एक क्षण से ज्यादा किसी आदमी के हाथ में दो क्षण होते ही नहीं
10.  पुराना करने की तरकीबों में हम निष्णात हैं ; प्रत्येक चीज में पुराने को खोजने को इतने आतुर हैं जिसका कोई हिसाब नहीं
11.  मनुष्य कितना विरोधाभासी सोचता है ; एक तरफ वह निरंतर पुराने की अपेक्षा किए हुए है और दूसरी तरफ नए की आकांक्षा भी किए हुए है ।
12.  प्रतिपल नए की खोज की हमारी दृष्टि होनी चाहिए कि नया क्या है ?
13.  जो कल था वह कल विदा हो गया । आज हर चीज नई है ।
14.  नए का सम्मान करना सीखें तो नया प्रकट होगा ।
15.  नए का सम्मान करें और जिंदगी की यंत्रवत पुनरुक्ति की आकांक्षा छोड़ दें ।
16.  जिंदगी को एक पुलक में जीने दें, एक अनिश्चय में जीने दें । इस असुरक्षा को स्वीकार कर लें ।
17.  जिंदगी एक अनिश्चय है और आदमी डर के कारण सब निश्चित कर लेता है ।
18.  वे ही लोग नए हो सकते हैं जो अनिश्चित में जीने की हिम्मत रखते हैं ।
19.  जिंदगी में नए का स्वागत नहीं है, पुराने का आग्रह है, तो सब पुराना हो जाएगा ।
20.  पुराने की अपेक्षा छोड़ दें ।
21.  हम अपने चारों तरफ क्या इकट्ठा कर रहें हैं इस पर निर्भर करेगा कि हमारे भीतर क्या घटित होगा । हमारे भीतर जो घटना घटेगी, वह हमारे हाथ से ही इकट्ठी की हुई है ।
22.  जो व्यक्ति एक बार नए के लिए मन का द्वार खोल लेता है, आज नहीं कल पाता है कि नए के पीछे परमात्मा प्रवेश कर गया है , क्योंकि परमात्मा अगर कुछ है तो जो निरंतर नया है, उसी का नाम है ।
23.  जिंदगी रोज नई है और जिंदगी रोज वहां पहुँच जाती है जहां कभी नहीं पहुँची थी ।
24.  परमात्मा वह है जो प्रतिपल होता है और प्रतिपल होता ही चला जाता है ।
25.  अगर हमारे पास वह तकनीक, वह तरकीब, वह शिल्प ,वह कला है जिससे हम हर जगह नए को खोज लें, तो हम परमात्मा हैं ।
26.  एक बार जिंदगी में नए का बोध होना शुरु हो जाए तो सब कुछ ठीक हो जाता है ।
27.  पुराने को मत खोजे, खोजेंगे तो वह मिल जाएगा क्योंकि वह है ।
28.  जिंदगी बहुत अद्भूत है । उसमें खोजने वाले को सब मिल जाता है । आदमी जो खोजने जाता है, वह उसे मिल ही जाता है ।
29.  ध्यान से समझ लेना, कि आपने खोजा था इस लिए मिल गया है और कोई कारण नहीं है उसके मिल जाने का ।
30.  जो कभी नहीं हुआ है वह आज हो, इसकी ओर हमारा खुला मन होना चाहिए ।
31.  पुराने सुखों से नए दुख भी बेहतर होते हैं क्योंकि नए होते हैं ।
32.  पुराने की अपेक्षा न करें, नया जब आवे तब उसे स्वीकार करें, पुराने की आकांक्षा न करें ।
33.  इस क्षण को नया करने की फिक्र करें । अगले क्षण की फिक्र न करें ।
34.  नए के द्वार अंतहीन हैं ।
35.  आज के दिन को पुराना न होने दें ।  

1 comment:

  1. बहुत बढ़िया पोस्ट! अच्छी और ज्ञानवर्धक जानकारी प्राप्त हुई! धन्यवाद!

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