प्रेम की तरंग
प्रेम की तरंग तो युवा मन में उठती है - अनुभवहीन मन में उठती है । प्रेम का तो विस्तार ही अनुभवहीनता में होता है । प्रेम तो एक तरह का पागलपन है । जब तुम बहुत अनुभवी हो जाते हो, तो प्रेम की तरंग उठती नहीं । अनुभव मार डालता है तरंग को । - ओशो ( कहै कबीर मैं पूरा पाया , प्रवचन सं. 16 से संकलित )
सुंदर विचार ।
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