उपनिषदों का एक वचन है : त्येन त्यक्तेन भुंजीथा: , जिन्होंने छोड़ा, उन्होने ही भोगा । बड़ा अपूर्व वचन है । उपनिषदों में इसके मुकाबले दूसरा कोई वचन नहीं । सब उपनिषद खो जाएं, यह एक वचन बच जाए, तो इसी से कुंजी मिल जाएगी और सारे उपनिषद् फिर से जन्माए जा सकते हैं । - ओशो ( कहै कबीर मैं पूरा पाया , प्रवचन सं.9 से संकलित )
सही बात !
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